India, Jan. 11 -- The Government of India has issued a release:

The new book by senior journalist and author Shri Vijay Trivedi, focusing on the multifaceted personality , ideology and political life of Bharat Ratna , former Prime Minister , late Atal Bihari Vajpayee , was formally released today .

On this occasion , speakers recalled Atal Bihari Vajpayee 's contributions to nation-building and described the book as an inspiring document of his life and work . Praising the writing of author Vijay Trivedi, it was said that this book will play an important role in introducing the new generation to Atal ji 's thoughts , values , and leadership .

पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और कार्यों को 12 अध्यायों में रोचक, तथ्यपरक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन से लेकर एक स्वयंसेवक से राष्ट्रीय नेता बनने की यात्रा, कारगिल युद्ध, परमाणु परीक्षण, आर्थिक उदारीकरण, नई टेलीकॉम नीति में उनकी भूमिका, आपातकाल का दौर, पाकिस्तान से मैत्री की पहल, भाषा-प्रेम और कवि-मन की अभिव्यक्ति, राजनीति से संन्यास तथा महाप्रयाण तक के सभी प्रमुख पड़ावों का विस्तृत वर्णन किया गया है।

लेखक ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, विचारधारा और नेतृत्व क्षमता को सरल, सहज और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को गहराई से समझ सकें।

पत्रकारिता के लगभग चार दशकों के अनुभव के साथ श्री विजय त्रिवेदी टेलीविजन और साहित्य जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वे इससे पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित 'हार नहीं मानूँगा', 'यदा यदा ही योगी', 'बीजेपी: कल, आज और कल' तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर केंद्रित 'संघम् शरणं गच्छामि' जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रकाशन विभाग की नई संस्कृत- हिन्दी द्विभाषी पत्रिका 'संगमनीप्रभा' के प्रथम अंक का भी लोकार्पण किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओम नाथ बिमली ने पत्रिका का लोकार्पण किया।

'संगमनीप्रभा' प्रकाशन विभाग की पहली त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका है। पत्रिका में प्रकाशित मूल सामग्री संस्कृत भाषा में होगी, जबकि हिन्दी भाषी पाठकों के लिए प्रत्येक पृष्ठ पर संस्कृत सामग्री का हिन्दी अनुवाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अनूठे प्रयास का उद्देश्य संस्कृत वाङ्मय की अमूल्य ज्ञान-परंपरा से नई पीढ़ी के पाठकों को परिचित कराना और उन्हें संस्कृत भाषा से जोड़ना है। पत्रिका का मूल्य 25 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि इसकी वार्षिक सदस्यता 100 रुपये में उपलब्ध होगी।

पत्रिका के प्रथम अंक की सराहना करते हुए प्रो. बिमली ने कहा कि विषय-वस्तु और डिज़ाइन के स्तर पर यह पत्रिका प्रकाशन विभाग के उत्कृष्ट प्रकाशनों की शृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग विविध विषयों पर श्रेष्ठ पुस्तकों के साथ-साथ योजना, कुरुक्षेत्र, बाल भारती और आजकल जैसी प्रतिष्ठित मासिक पत्रिकाओं तथा इम्प्लॉयमेंट न्यूज़ के प्रकाशन के लिए जाना जाता है। अब त्रैमासिक 'संगमनीप्रभा' के प्रकाशन के साथ विभाग की पहचान और सशक्त होगी।

On this occasion , the author of the book , Mr. Vijay Trivedi , Principal Director General of Publications Department , Mr. Bhupendra Kainthola, along with many eminent writers , litterateurs and senior officers of the department were present .

Disclaimer: The original story of this translated version is available on Press Information Bureau.

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